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अध्याय 2 — पृथ्वी की सतह का स्वरूप

Shaping of the Earth's Surface

कक्षा 9 | सामाजिक विज्ञान | हिंदी माध्यम

1. स्थलरूप (Landforms)

स्थलरूप पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक आकार और विशेषताएँ हैं। इनका निर्माण अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण तथा पृथ्वी की भूपर्पटी की गतियों जैसी विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं से होता है।

स्थलरूपों के प्रमुख उदाहरण हैं:

मुख्य विचार: पृथ्वी की सतह स्थिर नहीं है। आंतरिक और बाहरी शक्तियों के कारण इसमें निरंतर परिवर्तन होता रहता है।

2. पृथ्वी की सतह का गतिशील स्वरूप

पृथ्वी की सतह लगातार बदलती रहती है। इसके पीछे दो प्रकार की शक्तियाँ महत्वपूर्ण हैं:

आंतरिक शक्तियाँ

इनका उद्गम पृथ्वी के अंदर होता है और ये भूपर्पटी में बड़े पैमाने पर परिवर्तन कर सकती हैं।

बाहरी शक्तियाँ

ये पृथ्वी की सतह पर या उसके निकट कार्य करती हैं और पहले से बने स्थलरूपों को धीरे-धीरे बदलती रहती हैं।

सरल क्रम:
अपक्षय → अपरदन → परिवहन → निक्षेपण

3. पृथ्वी की आंतरिक संरचना

पृथ्वी की तीन प्रमुख परतें मानी जाती हैं:

परत मुख्य विशेषता
भूपर्पटी (Crust) पृथ्वी की सबसे बाहरी परत, जिस पर हम रहते हैं।
मैंटल (Mantle) भूपर्पटी के नीचे स्थित बहुत मोटी और गर्म परत।
क्रोड (Core) पृथ्वी का सबसे आंतरिक, अत्यधिक गर्म और भारी भाग।
पृथ्वी की आंतरिक परतें
भूपर्पटी मैंटल क्रोड

4. स्थलमंडल (Lithosphere)

स्थलमंडल में भूपर्पटी तथा मैंटल का ऊपरी भाग शामिल होता है। यह कठोर भाग कई विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है।

अध्याय की सामग्री के अनुसार स्थलमंडल की मोटाई लगभग 100 किमी बताई गई है।

5. दुर्बलमंडल / एस्थेनोस्फीयर (Asthenosphere)

स्थलमंडल के नीचे एस्थेनोस्फीयर स्थित है। यह गर्म और गतिशील परत है जिसमें आंशिक रूप से पिघली हुई चट्टानें पाई जाती हैं।

यही गतिशीलता विवर्तनिक प्लेटों की गति में सहायता करती है।

6. क्रोड (Core)

बाह्य क्रोड

बाह्य क्रोड मुख्यतः लोहे और निकेल से बनी द्रव परत है।

आंतरिक क्रोड

आंतरिक क्रोड ठोस, अत्यधिक गर्म और बहुत घना भाग है।

7. प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics)

प्लेट विवर्तनिकी पृथ्वी की भूपर्पटी की गति को समझाने वाला सिद्धांत है। आपके दिए गए Notes में इसे W. J. Morgan से जोड़ा गया है।

पृथ्वी का बाहरी भाग कई बड़ी और छोटी विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें नीचे स्थित गर्म और गतिशील परत के ऊपर बहुत धीमी गति से चलती हैं।

प्लेटों की गति से पर्वत, भूकंप, ज्वालामुखी, महासागरीय बेसिन और अन्य प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं को समझने में सहायता मिलती है।

8. विवर्तनिक प्लेटों के प्रकार

प्रकार अर्थ
महाद्वीपीय प्लेट मुख्यतः महाद्वीपीय भागों को वहन करती है।
महासागरीय प्लेट महासागरीय तल को वहन करती है।
मिश्रित प्लेट महाद्वीपीय और महासागरीय दोनों भागों को वहन करती है।

प्रमुख प्लेटों में प्रशांत, यूरेशियन, अफ्रीकी, उत्तरी अमेरिकी, दक्षिणी अमेरिकी, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई और अंटार्कटिक प्लेट शामिल हैं।

9. संवहन धाराएँ (Convection Currents)

पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी के कारण मैंटल के पदार्थ में गति होती है। गर्म पदार्थ ऊपर की ओर उठता है और ठंडा पदार्थ नीचे की ओर जाता है।

इस निरंतर गति से संवहन धाराएँ बनती हैं, जो विवर्तनिक प्लेटों को धक्का देने और खींचने में भूमिका निभाती हैं।

संवहन धारा की सरल अवधारणा
गर्म पदार्थ ↑

10. प्लेट सीमाएँ (Plate Boundaries)

अभिसारी सीमा (Convergent Boundary)

दो प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं। महाद्वीपीय प्लेटों के टकराने से वलित पर्वत बन सकते हैं, जैसे हिमालय।

महासागरीय प्लेट और महाद्वीपीय प्लेट के टकराव से ज्वालामुखीय गतिविधि और भूकंप हो सकते हैं।

अपसारी सीमा (Divergent Boundary)

दो प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं। मैग्मा ऊपर उठकर नई भूपर्पटी का निर्माण कर सकता है। इसका उदाहरण Mid-Atlantic Ridge है।

रूपांतर सीमा (Transform Boundary)

दो प्लेटें एक-दूसरे के पास से विपरीत दिशाओं में खिसकती हैं। यहाँ सामान्यतः भूपर्पटी न तो बनती है और न नष्ट होती है। इससे भूकंप हो सकते हैं। San Andreas Fault इसका उदाहरण है।

सीमा प्लेटों की गति प्रमुख परिणाम
अभिसारी एक-दूसरे की ओर पर्वत, भूकंप, ज्वालामुखी
अपसारी एक-दूसरे से दूर नई भूपर्पटी
रूपांतर एक-दूसरे के पास से खिसकना मुख्यतः भूकंप

11. प्लेट विवर्तनिकी का महत्व

अधिकांश भूकंप और ज्वालामुखी प्लेट सीमाओं के आसपास पाए जाते हैं।

12. रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire)

रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों ओर स्थित एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों की उच्च सांद्रता पाई जाती है।

इसकी प्रमुख वजह विवर्तनिक प्लेटों की गति और उनके बीच होने वाली परस्पर क्रिया है।

13. भारत में भूकंप

भारत में अतीत में कई बड़े भूकंप आए हैं। भूकंप से मानव जीवन, भवनों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।

घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूकंप से होने वाली क्षति का खतरा विशेष रूप से अधिक हो सकता है।

14. प्राचीन भारत में भूकंप की समझ

प्राचीन भारत में भूकंप को “भूकम्प” कहा जाता था, जिसका अर्थ पृथ्वी का हिलना या कांपना है।

वराहमिहिर ने अपनी प्रसिद्ध रचना बृहत्संहिता में भूकंप से संबंधित चर्चा की।

दिए गए Notes के अनुसार उन्होंने हवा, वर्षा, बादल, पशु व्यवहार और ग्रहों की स्थिति जैसे अवलोकनों को भूकंप से जोड़कर देखा था।

15. मड ज्वालामुखी (Mud Volcano)

भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में Baratang Island पर एक दुर्लभ प्राकृतिक विशेषता के रूप में मड ज्वालामुखी पाया जाता है।

यह सामान्य ज्वालामुखी की तरह आग या लावा नहीं निकालता। इसके स्थान पर भूमिगत गैसों और दबाव के कारण मिट्टी बाहर निकलती है।

16. अपक्षय (Weathering)

अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटती या बदलती हैं।

महत्वपूर्ण: अपक्षय में टूटे हुए पदार्थ का स्थानांतरण नहीं होता। चट्टान अपने मूल स्थान पर ही टूटती है।

अपक्षय के प्रकार

(क) भौतिक अपक्षय

चट्टान की रासायनिक संरचना बदले बिना उसके छोटे-छोटे टुकड़े हो जाना।

कारण:

(ख) रासायनिक अपक्षय

जल, वायु और अम्लों जैसी रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण चट्टानों के खनिजों में परिवर्तन होना।

(ग) जैविक अपक्षय

पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों से चट्टानों का टूटना।

उदाहरण: चट्टानों की दरारों में पौधों की जड़ें बढ़कर उन्हें चौड़ा कर सकती हैं।

अपक्षय का महत्व

17. अपरदन (Erosion)

अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें मिट्टी, चट्टान और अन्य सतही पदार्थ प्राकृतिक कारकों द्वारा घिसकर हटाए जाते हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाए जाते हैं।

अपक्षय अपरदन
चट्टान टूटती है। पदार्थ हटता और स्थानांतरित होता है।
पदार्थ का स्थानांतरण आवश्यक नहीं। पदार्थ का परिवहन होता है।
मूल स्थान पर होता है। दूसरे स्थान तक पदार्थ पहुँच सकता है।

अपरदन के प्रमुख प्रकार

18. मनुष्यों पर अपरदन के प्रभाव

19. मृदा एवं जल संरक्षण

कंटूरिंग (Contouring)

ढाल वाले क्षेत्र में समोच्च रेखाओं के साथ खाइयाँ या संरचनाएँ बनाकर जल के बहाव को धीमा करने की विधि कंटूरिंग कहलाती है।

बंडिंग (Bunding)

खेतों में मिट्टी के बाँध या मेड़ बनाकर पानी के बहाव को नियंत्रित किया जाता है।

टेरेसिंग (Terracing)

ढाल वाले क्षेत्रों को सीढ़ीनुमा खेतों में बदलकर पानी के बहाव और मिट्टी के अपरदन को कम किया जाता है।

मुख्य उद्देश्य: जल बहाव को कम करना, मिट्टी को बचाना और भूमि की उत्पादकता बनाए रखना।

20. भूमि अपरदन को प्रभावित करने वाले कारक

वनस्पति मिट्टी को बाँधने में सहायता करती है और जमीन के पास हवा की गति को कम करती है।

अधिक वनस्पति → अधिक मिट्टी स्थिरता → कम पवन अपरदन

कम वनस्पति → खुली मिट्टी → अधिक पवन अपरदन → अधिक धूल भरी आँधी

21. मरुस्थलीकरण और धूल भरी आँधी

शुष्क क्षेत्रों में तेज हवाएँ सूखी मिट्टी और महीन कणों को बड़ी मात्रा में उड़ा सकती हैं। इसे धूल भरी आँधी कहा जाता है।

पर्यावरणीय प्रभाव

मानवीय प्रभाव

रोकथाम

22. कार्स्ट स्थलाकृति (Karst Topography)

कार्स्ट स्थलाकृति मुख्यतः चूना-पत्थर जैसे घुलनशील चट्टानों वाले क्षेत्रों में भूमिगत जल द्वारा रासायनिक घुलन की प्रक्रिया से विकसित होती है।

सिंकहोल (Sinkhole)

भूमिगत गुहा में जमीन के धँसने या घुलनशील चट्टान के घुलने के कारण बनने वाले गड्ढेनुमा अवसाद को सिंकहोल कहते हैं।

23. भूस्खलन (Landslide)

गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में मिट्टी, चट्टान या मलबे का ढाल के नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है।

प्रमुख कारण

भारी वर्षा → पानी का भूमि में प्रवेश → भार और जल-दाब में वृद्धि → ढाल की स्थिरता में कमी → भूस्खलन

24. हिमस्खलन (Avalanche)

पर्वतीय ढाल पर बर्फ और हिम का अचानक तेजी से नीचे की ओर खिसकना हिमस्खलन कहलाता है। इसमें चट्टान और मलबा भी शामिल हो सकता है।

भारी हिमपात, तापमान में परिवर्तन और कंपन जैसी परिस्थितियाँ हिमस्खलन के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

अचानक तापमान बढ़ने पर बर्फ के कणों के बीच का बंधन कमजोर हो सकता है, जिससे हिमस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

25. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड — GLOF

हिमनदीय झील की प्राकृतिक रोक/बाँध के ऊपर से पानी बहने या उसके टूटने पर झील का पानी अचानक नीचे की ओर निकल सकता है। इसे Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) कहते हैं।

तापमान में वृद्धि → बर्फ/हिम का तेज पिघलना → हिमनदीय झील का विस्तार → प्राकृतिक बाँध पर अधिक दबाव → संभावित GLOF

26. प्राकृतिक आपदाओं की तुलना

आपदा मुख्य पदार्थ मुख्य कारण मुख्य खतरा
भूस्खलन चट्टान, मिट्टी, मलबा वर्षा, भूकंप, मानव गतिविधि ढाल पर पदार्थ का खिसकना
हिमस्खलन बर्फ और हिम भारी हिमपात, तापमान, कंपन तेजी से हिम का नीचे आना
GLOF जल और मलबा हिमनदीय झील का बाँध टूटना अचानक बाढ़
धूल भरी आँधी सूक्ष्म मिट्टी और धूल तेज हवा और शुष्क परिस्थितियाँ धूल और मृदा अपरदन

27. आंतरिक शक्तियाँ (Endogenic Forces)

आंतरिक शक्तियों में शामिल हैं:

इन प्रक्रियाओं से पर्वत, पठार, घाटियाँ और महासागरीय बेसिन जैसे बड़े स्थलरूपों के निर्माण में योगदान मिलता है।

28. बाहरी शक्तियाँ (Exogenic Forces)

बाहरी शक्तियाँ पृथ्वी की सतह को लगातार संशोधित करती रहती हैं।

अपक्षय → अपरदन → परिवहन → निक्षेपण

29. आंतरिक और बाहरी शक्तियों का परस्पर संबंध

स्थलरूप पृथ्वी की सतह को ऊपर उठाने वाली आंतरिक शक्तियों और उसे काटने, घिसने तथा पुनः वितरित करने वाली बाहरी शक्तियों के लंबे समय तक चलने वाले परस्पर प्रभाव का परिणाम हैं।

आंतरिक शक्तियाँ → निर्माण और उत्थान
बाहरी शक्तियाँ → अपरदन, परिवहन और पुनर्वितरण

इसी निरंतर प्रक्रिया से आज दिखाई देने वाला भूदृश्य विकसित हुआ है।

30. स्थलरूपों की विविधता

इन प्रक्रियाओं से अनेक प्रकार के स्थलरूप बनते हैं:

31. मानव जीवन में स्थलरूपों का महत्व

स्थलरूप मानव जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित करते हैं। वे निर्धारित करते हैं:

उदाहरण: उपजाऊ मैदान सामान्यतः घनी आबादी और गहन कृषि को सहारा देते हैं, जबकि ऊँचे और खड़े पर्वतीय क्षेत्रों में बस्तियों तथा परिवहन की संभावनाएँ सीमित हो सकती हैं।

32. स्थलरूप और प्राकृतिक आपदाएँ

स्थलरूपों को समझना आपदा की तैयारी और जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ भौतिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में निम्नलिखित आपदाओं का खतरा अधिक हो सकता है:

33. Quick Revision

  1. स्थलरूप पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक विशेषताएँ हैं।
  2. पृथ्वी की सतह आंतरिक और बाहरी शक्तियों से लगातार बदलती रहती है।
  3. स्थलमंडल भूपर्पटी और मैंटल के ऊपरी भाग से मिलकर बना है।
  4. एस्थेनोस्फीयर गर्म और गतिशील परत है।
  5. विवर्तनिक प्लेटें बहुत धीमी गति से चलती हैं।
  6. प्लेट सीमाएँ तीन प्रमुख प्रकार की होती हैं—अभिसारी, अपसारी और रूपांतर।
  7. रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के आसपास स्थित भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों वाला क्षेत्र है।
  8. अपक्षय में चट्टानें अपने स्थान पर टूटती हैं।
  9. अपरदन में पदार्थ का हटना और परिवहन होता है।
  10. निक्षेपण में परिवहन किए गए पदार्थ जमा होते हैं।
  11. भूस्खलन में मिट्टी, चट्टान और मलबा ढाल पर नीचे की ओर खिसकते हैं।
  12. हिमस्खलन में बर्फ और हिम तेजी से ढाल पर नीचे आते हैं।
  13. GLOF हिमनदीय झील से अचानक निकलने वाली बाढ़ है।
  14. धूल भरी आँधी में तेज हवाएँ सूखी मिट्टी और महीन कणों को उड़ा ले जाती हैं।

34. महत्वपूर्ण शब्दावली

English Term हिंदी अर्थ
Landformस्थलरूप
Plate Tectonicsप्लेट विवर्तनिकी
Lithosphereस्थलमंडल
Asthenosphereएस्थेनोस्फीयर / दुर्बलमंडल
Weatheringअपक्षय
Erosionअपरदन
Transportationपरिवहन
Depositionनिक्षेपण
Earthquakeभूकंप
Volcanoज्वालामुखी
Landslideभूस्खलन
Avalancheहिमस्खलन
GLOFहिमनदीय झील से अचानक बाढ़
Dust Stormधूल भरी आँधी
Karst Topographyकार्स्ट स्थलाकृति
Sinkholeसिंकहोल / धँसाव गड्ढा

35. अभ्यास प्रश्न

  1. स्थलरूप क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
  2. पृथ्वी की तीन प्रमुख आंतरिक परतों का वर्णन कीजिए।
  3. स्थलमंडल और एस्थेनोस्फीयर में अंतर बताइए।
  4. प्लेट विवर्तनिकी क्या है?
  5. संवहन धाराएँ क्या हैं?
  6. अभिसारी, अपसारी और रूपांतर प्लेट सीमाओं में अंतर कीजिए।
  7. रिंग ऑफ फायर क्या है?
  8. भारत में भूकंप से होने वाली क्षति किन कारणों से गंभीर हो सकती है?
  9. वराहमिहिर ने भूकंप के संबंध में क्या चर्चा की?
  10. मड ज्वालामुखी क्या है?
  11. अपक्षय और अपरदन में अंतर बताइए।
  12. अपक्षय के तीन प्रकारों को समझाइए।
  13. मृदा एवं जल संरक्षण की तीन विधियाँ लिखिए।
  14. कार्स्ट स्थलाकृति क्या है?
  15. भूस्खलन के कारण लिखिए।
  16. हिमस्खलन और GLOF में अंतर बताइए।
  17. धूल भरी आँधी के पर्यावरणीय प्रभाव लिखिए।
  18. आंतरिक और बाहरी शक्तियों में अंतर बताइए।
  19. स्थलरूप मानव जीवन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
  20. स्थलरूपों और प्राकृतिक आपदाओं के बीच संबंध समझाइए।