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Practice Set 1 — Hindi Medium
Class 10 History | Chapter 2
कुल प्रश्न: 30
कुल अंक: 30
स्तर: NCERT + Board + Competitive
प्रश्न प्रकार: MCQ • Matching • Chronological • Assertion-Reason • Passage
1. चंपारण सत्याग्रह 2. खेड़ा सत्याग्रह 3. अहमदाबाद मिल हड़ताल 4. रॉलेट सत्याग्रह
1. असहयोग आंदोलन 2. चौरी-चौरा घटना 3. साइमन कमीशन का आगमन 4. पूर्ण स्वराज की घोषणा
1. साइमन कमीशन 2. लाहौर कांग्रेस 3. दांडी मार्च 4. गांधी-इरविन समझौता
1. 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया 2. गांधीजी ने इरविन को 11 मांगों वाला पत्र भेजा 3. दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा गया
1. प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति 2. रॉलेट एक्ट 3. असहयोग आंदोलन 4. स्वराज पार्टी का गठन
1. चंपारण — A. राजस्व राहत 2. खेड़ा — B. नील की खेती 3. अहमदाबाद — C. मिल मजदूर 4. रॉलेट — D. दमनकारी कानून
1. महात्मा गांधी — A. सत्याग्रह 2. बाबा रामचंद्र — B. अवध किसान आंदोलन 3. सी. आर. दास — C. स्वराज पार्टी 4. अल्लूरी सीताराम राजू — D. गुडेम हिल्स
1. मद्रास — A. Justice Party 2. असम — B. Plantation Workers 3. गुडेम हिल्स — C. अल्लूरी सीताराम राजू 4. अवध — D. बाबा रामचंद्र
1. 1920 — A. असहयोग आंदोलन 2. 1922 — B. चौरी-चौरा 3. 1928 — C. साइमन कमीशन 4. 1929 — D. पूर्ण स्वराज
1. नमक — A. सार्वभौमिक आवश्यकता 2. सत्याग्रह — B. सत्य और अहिंसा 3. स्वराज — C. आत्म-शासन 4. बहिष्कार — D. विदेशी वस्तुओं का त्याग
निर्देश: सही विकल्प चुनें:
A) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या है। B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण सही व्याख्या नहीं है। C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है। D) कथन गलत है लेकिन कारण सही है।
पैसेज: महात्मा गांधी के लिए सत्याग्रह केवल सरकार के विरुद्ध विरोध का साधन नहीं था। यह सत्य और अहिंसा पर आधारित आत्मबल का सिद्धांत था। सत्याग्रही का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी को हिंसा से पराजित करना नहीं, बल्कि सत्य और नैतिक शक्ति के माध्यम से उसके विवेक को प्रभावित करना था। गांधीजी का मानना था कि अन्यायपूर्ण कानून का शांतिपूर्ण ढंग से विरोध किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर कष्ट सहकर भी सत्य के पक्ष में खड़ा रहा जा सकता है। इसी विचारधारा के आधार पर उन्होंने भारत में चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद और बाद में रॉलेट एक्ट के विरुद्ध आंदोलनों का नेतृत्व किया। सत्याग्रह में अनुशासन, आत्मसंयम और अहिंसा को विशेष महत्व दिया गया।