# कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान — अध्याय 4: सभ्यता की शुरुआत ```html Class 9 Chapter 4 - Beginnings of Civilisation | GSI MANTRA

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कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान

अध्याय 4 — सभ्यता की शुरुआत

Beginnings of Civilisation | उन्नत स्तर के हिंदी माध्यम नोट्स

अध्याय का परिचय

मानव सभ्यता का विकास अचानक नहीं हुआ। यह लाखों वर्षों तक चले मानव विकास, पर्यावरण के साथ अनुकूलन, औजार निर्माण, आग के उपयोग, भोजन प्राप्त करने की तकनीकों, कृषि, पशुपालन, स्थायी बस्तियों, शिल्प, व्यापार, लेखन और राजनीतिक संस्थाओं के क्रमिक विकास का परिणाम था।

प्रारंभिक मानव छोटे समूहों में रहते थे और मुख्यतः शिकार तथा भोजन-संग्रह पर निर्भर थे। बाद में कृषि और पशुपालन के विकास ने मानव जीवन को स्थायी बनाया। गाँव विकसित हुए और धीरे-धीरे नगरों तथा जटिल सभ्यताओं का निर्माण हुआ।

इस अध्याय में हम प्रारंभिक मानव से लेकर हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन की प्रारंभिक सभ्यताओं तक की यात्रा का अध्ययन करेंगे।

1. प्रागैतिहासिक काल और पुरातत्व

जिस काल के लिए किसी समाज के लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं होते, उसे सामान्यतः प्रागैतिहासिक काल कहा जाता है। इस काल को समझने के लिए पुरातत्वविद् भौतिक अवशेषों का अध्ययन करते हैं।

पुरातात्त्विक स्रोत

  • पत्थर के औजार
  • मानव और पशु अस्थियाँ
  • मिट्टी के बर्तन
  • अनाज और पौधों के अवशेष
  • आवासों के अवशेष
  • दफनाने की प्रथाएँ
  • आभूषण
  • धातु की वस्तुएँ
  • मुहरें
  • शैल चित्र
  • लेख और अभिलेख, जहाँ उपलब्ध हों
याद रखें: लिखित स्रोत न होने पर भी पुरातात्त्विक अवशेष अतीत के समाज, अर्थव्यवस्था और तकनीक को समझने का महत्वपूर्ण साधन हैं।

2. मानव के पूर्वज और मानव विकास

आधुनिक मानव का वैज्ञानिक नाम Homo sapiens है। मानव विकास एक जटिल और लंबी प्रक्रिया थी। इसमें जैविक विकास के साथ-साथ तकनीकी और सांस्कृतिक विकास भी हुआ।

Australopithecus

अफ्रीका में पाए जाने वाले प्रारंभिक होमिनिन समूह। इनमें दो पैरों पर चलने की क्षमता विकसित हो चुकी थी।

Homo habilis

प्रारंभिक मानव समूहों में से एक, जिसे पुराने पत्थर के औजारों के प्रयोग से जोड़ा जाता है।

Homo erectus

एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक मानव प्रजाति, जिसका विस्तार अफ्रीका से अन्य क्षेत्रों तक हुआ।

Neanderthals

यूरोप और पश्चिमी एशिया में रहने वाला निकट संबंधी मानव समूह।

Homo sapiens

आधुनिक मानव प्रजाति, जिसने समय के साथ विश्व के अनेक भागों में विस्तार किया।

मानव विकास को एक सीधी सीढ़ी की तरह नहीं समझना चाहिए। अलग-अलग मानव समूह अलग-अलग समय में अस्तित्व में रहे और कुछ समय तक एक-दूसरे के साथ भी रहे।

3. पुरातात्त्विक युगों का विभाजन

प्रागैतिहासिक काल को समझने के लिए पुरातत्वविद् औजारों और तकनीकी परिवर्तनों के आधार पर विभिन्न कालों का विभाजन करते हैं।

काल अंग्रेजी नाम मुख्य विशेषताएँ
पुरापाषाण काल Palaeolithic शिकार-संग्रह, पत्थर के औजार, गतिशील जीवन
मध्यपाषाण काल Mesolithic सूक्ष्म पाषाण औजार, शिकार, मछली पकड़ना, संग्रह
नवपाषाण काल Neolithic कृषि, पशुपालन, स्थायी बस्तियाँ और घिसे हुए पत्थर के औजार
ताम्रपाषाण काल Chalcolithic ताँबे के साथ पत्थर के औजारों का प्रयोग
कांस्य युग Bronze Age कांस्य तकनीक, शहरीकरण, शिल्प, व्यापार और जटिल संस्थाएँ
इन कालों की तिथियाँ पूरे विश्व में समान नहीं थीं। विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी परिवर्तन अलग-अलग समय पर हुए।

4. पुरापाषाण काल — Old Stone Age

समय-सीमा

पुरापाषाण काल की शुरुआत पारंपरिक पुरातात्त्विक वर्गीकरण में लगभग 26 लाख वर्ष पहले से मानी जाती है। इसकी समाप्ति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर हुई।

जीवन-शैली

  • शिकार और भोजन-संग्रह
  • जंगली फल, कंद-मूल और पौधों का संग्रह
  • जानवरों का शिकार
  • जल और भोजन की तलाश में स्थान परिवर्तन
  • छोटे समूहों में जीवन
  • पत्थर के औजारों का उपयोग
  • आग का उपयोग

प्रमुख औजार

हैंडऐक्स, क्लीवर, फ्लेक तथा अन्य पत्थर के औजारों का उपयोग किया जाता था। इन औजारों से काटने, खुरचने, शिकार और भोजन तैयार करने जैसे कार्य किए जाते थे।

5. मध्यपाषाण काल — Mesolithic Age

मध्यपाषाण काल में मानव जीवन में अनेक परिवर्तन हुए। शिकार और संग्रह जारी रहे, लेकिन भोजन प्राप्त करने के तरीके अधिक विविध हुए।

मुख्य विशेषताएँ

  • Microliths अर्थात सूक्ष्म पाषाण औजार
  • छोटे और अधिक विशिष्ट औजार
  • शिकार की नई तकनीक
  • मछली पकड़ना
  • जलीय संसाधनों का उपयोग
  • शैल चित्र
  • कुछ क्षेत्रों में अर्ध-स्थायी बस्तियाँ
  • भोजन उत्पादन की ओर संक्रमण

6. नवपाषाण काल — New Stone Age

नवपाषाण काल मानव इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी चरणों में से एक था। इस काल में मनुष्य ने कृषि और पशुपालन को अपनाना शुरू किया।

नवपाषाण क्रांति

Neolithic Revolution उस दीर्घकालीन परिवर्तन को कहा जाता है जिसमें मानव समुदाय शिकार और संग्रह पर मुख्य निर्भरता से कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन की ओर बढ़े।

प्रमुख परिवर्तन

  • कृषि का विकास
  • पौधों का वशीकरण
  • पशुओं का वशीकरण
  • स्थायी बस्तियों का विकास
  • मिट्टी के बर्तनों का विकास
  • भोजन का भंडारण
  • घिसे हुए पत्थर के औजार
  • शिल्प और कारीगरी
  • जनसंख्या में वृद्धि

7. ताम्रपाषाण काल — Copper-Stone Age

Chalcolithic शब्द का अर्थ है Copper-Stone अर्थात ताम्र-पाषाण। इस चरण में मानव ने ताँबे का उपयोग शुरू किया, लेकिन पत्थर के औजार पूरी तरह समाप्त नहीं हुए।

मुख्य विशेषताएँ

  • ताँबे के औजारों का उपयोग
  • पत्थर के औजारों का भी प्रयोग
  • कृषि और पशुपालन
  • गाँवों का विकास
  • मिट्टी के बर्तनों का निर्माण
  • शिल्प और धातुकर्म में वृद्धि
  • क्षेत्रीय व्यापार
ताम्रपाषाण काल को पाषाण युग और कांस्य युग के बीच की एक महत्वपूर्ण तकनीकी अवस्था के रूप में समझा जा सकता है, लेकिन इसका समय सभी क्षेत्रों में समान नहीं था।

8. कांस्य युग — Bronze Age

कांस्य युग वह चरण है जिसमें कांस्य धातु का महत्वपूर्ण उपयोग हुआ। कांस्य मुख्यतः ताँबा और टिन की मिश्रधातु है। इस तकनीक ने औजार, हथियार और शिल्प उत्पादन को नया रूप दिया।

कांस्य युग की प्रमुख विशेषताएँ

  • कांस्य के औजार और हथियार
  • धातुकर्म का विकास
  • विशेषीकृत कारीगरों का विकास
  • कृषि उत्पादन में वृद्धि
  • अतिरिक्त उत्पादन और भंडारण
  • व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार
  • नगरों का विकास
  • सामाजिक वर्गों का विकास
  • राजनीतिक संस्थाओं का विकास
  • लेखन और अभिलेखों का विकास कुछ क्षेत्रों में
  • विशाल सार्वजनिक और धार्मिक भवनों का निर्माण

कांस्य युग और सभ्यता का विकास

कांस्य तकनीक अकेले सभ्यता के विकास का कारण नहीं थी। कृषि, व्यापार, जनसंख्या, शिल्प विशेषज्ञता, प्रशासन और संसाधनों के संगठन ने मिलकर प्रारंभिक नगर सभ्यताओं को विकसित किया।

कांस्य युग की प्रमुख सभ्यताएँ

सभ्यता मुख्य क्षेत्र विशेषता
हड़प्पा दक्षिण एशिया नगर योजना, जल निकासी, शिल्प और व्यापार
सुमेरियन दक्षिणी मेसोपोटामिया नगर-राज्य, कीलाक्षर, मंदिर संस्थाएँ
प्राचीन मिस्र नील घाटी फैरो, पिरामिड, लेखन और केंद्रीकृत शासन
प्रारंभिक चीन पीली नदी क्षेत्र कांस्य तकनीक, शांग परंपरा और प्रारंभिक लेखन

9. हड़प्पा सभ्यता — Harappan Civilisation

हड़प्पा सभ्यता दक्षिण एशिया की सबसे प्रारंभिक नगरीय सभ्यताओं में से एक थी। इसका परिपक्व नगरीय चरण सामान्यतः लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है।

विस्तार

इस सभ्यता का विस्तार वर्तमान पाकिस्तान के बड़े भाग और भारत के उत्तर-पश्चिमी तथा पश्चिमी क्षेत्रों तक था। इसके स्थल पंजाब, सिंध, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मिले हैं।

प्रमुख स्थल

हड़प्पा

वर्तमान पाकिस्तान में। सभ्यता का नाम इसी स्थल से लिया गया।

मोहनजोदड़ो

सिंध क्षेत्र का प्रसिद्ध नगरीय केंद्र।

धोलावीरा

गुजरात में स्थित, जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध।

लोथल

गुजरात में स्थित, शिल्प और समुद्री संपर्कों से संबंधित।

राखीगढ़ी

हरियाणा का विशाल हड़प्पाई स्थल।

कालीबंगा

राजस्थान का महत्वपूर्ण हड़प्पाई स्थल।

10. हड़प्पा सभ्यता की खोज

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे स्थलों की व्यवस्थित खुदाई से इस सभ्यता का वास्तविक महत्व सामने आया।

  • दयाराम साहनी — हड़प्पा की प्रारंभिक महत्वपूर्ण खुदाई से जुड़े।
  • राखालदास बनर्जी — मोहनजोदड़ो की खुदाई में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • जॉन मार्शल — सभ्यता के महत्व को व्यापक रूप से सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
हड़प्पा सभ्यता की खोज ने दक्षिण एशिया के प्राचीन इतिहास की समझ को पूरी तरह बदल दिया।

11. हड़प्पाई नगर योजना

मुख्य विशेषताएँ

  • योजनाबद्ध सड़कें
  • ईंटों का मानकीकृत उपयोग
  • घरों की व्यवस्थित योजना
  • कुएँ
  • नालियाँ
  • जलाशय
  • सार्वजनिक भवन
  • शिल्प उत्पादन क्षेत्र
  • जल प्रबंधन

सड़कें

कई हड़प्पाई नगरों में सड़कें योजनाबद्ध तरीके से बनाई गई थीं। कई स्थानों पर छोटी सड़कें बड़ी सड़कों से जुड़ी थीं और कुछ सड़कों का विन्यास लगभग समकोण पर था।

जल निकासी

हड़प्पा सभ्यता की नालियाँ उसकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक हैं। कई घरों से निकलने वाला पानी छोटी नालियों के माध्यम से बड़ी नालियों तक पहुँचता था।

12. हड़प्पा सभ्यता के घर

  • ईंटों से बने घर
  • कई घरों में आँगन
  • स्नान के लिए स्थान
  • कई घरों में जल निकासी की व्यवस्था
  • कई नगरों में कुएँ
  • निजता को ध्यान में रखकर घरों की योजना

हड़प्पाई घरों की योजना से पता चलता है कि स्वच्छता, पानी और निजी जीवन को विशेष महत्व दिया जाता था।

13. हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था

कृषि

कृषि अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार थी। गेहूँ, जौ और अन्य फसलों की खेती के प्रमाण मिलते हैं। कपास के प्रारंभिक उपयोग के प्रमाण भी महत्वपूर्ण हैं।

शिल्प

  • मनका निर्माण
  • मिट्टी के बर्तन
  • धातु का काम
  • शंख की वस्तुएँ
  • आभूषण
  • पत्थर की वस्तुएँ
  • मुहरें

14. हड़प्पा सभ्यता का व्यापार

हड़प्पाई लोगों के स्थानीय और दूरस्थ क्षेत्रों से व्यापारिक संबंध थे। अफगानिस्तान, ईरान और मेसोपोटामिया के साथ संपर्क के पुरातात्त्विक प्रमाण मिलते हैं।

व्यापारिक वस्तुएँ

  • मनके
  • अर्ध-कीमती पत्थर
  • धातुएँ
  • शंख
  • आभूषण
  • शिल्प वस्तुएँ

मेसोपोटामियाई स्रोतों में Meluhha नाम मिलता है, जिसे अनेक विद्वान सिंधु क्षेत्र से जोड़ते हैं।

15. हड़प्पा लिपि

हड़प्पाई लोगों द्वारा प्रयोग किए गए संकेत मुहरों, मिट्टी के बर्तनों और अन्य वस्तुओं पर मिलते हैं।

  • छोटे लेख सामान्य हैं।
  • मुहरों पर अनेक संकेत मिलते हैं।
  • लिपि की भाषा निश्चित नहीं है।
  • लिपि अभी तक निर्णायक रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है।
महत्वपूर्ण: हड़प्पा लिपि के अपठित होने के कारण उनकी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था के बारे में कई निष्कर्ष पुरातात्त्विक प्रमाणों पर आधारित अनुमान हैं।

16. हड़प्पाई समाज

हड़प्पाई समाज में अलग-अलग प्रकार के व्यवसाय और शिल्प विशेषज्ञता मौजूद थी।

  • किसान
  • कारीगर
  • कुम्हार
  • धातुकर्मी
  • मनका निर्माता
  • व्यापारी
  • निर्माण कार्यकर्ता
  • प्रशासन से जुड़े लोग

17. हड़प्पाई राजनीतिक व्यवस्था

हड़प्पाई राजनीतिक व्यवस्था का स्वरूप निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट अभिलेख नहीं मिला है जो किसी राजा, राजवंश या साम्राज्य का स्पष्ट विवरण देता हो।

लेकिन ईंटों, बाटों, मुहरों और नगर योजना में दिखाई देने वाला मानकीकरण किसी प्रकार के व्यापक संगठन और समन्वय की ओर संकेत करता है।

उन्नत तथ्य: हड़प्पा सभ्यता को सीधे-सीधे “राजाओं का साम्राज्य” कहना प्रमाणित नहीं है। राजनीतिक संगठन को लेकर विद्वानों के विभिन्न मत हैं।

18. मेसोपोटामिया सभ्यता

Mesopotamia का अर्थ है—“दो नदियों के बीच की भूमि”। यह मुख्यतः टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के बीच का क्षेत्र था। यह क्षेत्र मुख्य रूप से वर्तमान इराक से संबंधित है।

मेसोपोटामिया की प्रमुख सभ्यताएँ

  • सुमेरियन
  • अक्कादी
  • बेबीलोनियन
  • असीरियन

मेसोपोटामिया का महत्व

यह क्षेत्र प्रारंभिक नगरों, लेखन, प्रशासन, गणित, व्यापार, मंदिर संस्थाओं और जटिल राजनीतिक संगठन के विकास का प्रमुख केंद्र था।

19. सुमेरियन सभ्यता

सुमेरियन सभ्यता दक्षिणी मेसोपोटामिया में विकसित हुई। सुमेरियन नगरों ने प्रारंभिक शहरी जीवन और नगर-राज्य की परंपरा को विकसित किया।

प्रमुख नगर-राज्य

  • उरुक
  • उर
  • लागाश
  • एरिडु

नगर-राज्य क्या था?

नगर-राज्य एक ऐसा राजनीतिक क्षेत्र था जिसमें एक प्रमुख नगर तथा उसके आसपास का क्षेत्र शामिल होता था। प्रत्येक नगर-राज्य की अपनी राजनीतिक और धार्मिक संस्थाएँ हो सकती थीं।

20. कीलाक्षर लिपि — Cuneiform

मेसोपोटामिया में विकसित Cuneiform दुनिया की सबसे प्रारंभिक ज्ञात लेखन प्रणालियों में से एक है।

गीली मिट्टी की पट्टियों पर नरकट जैसी लेखनी से विशेष आकार के चिह्न बनाए जाते थे। इन अभिलेखों में व्यापार, कर, अनाज, प्रशासन, कानून और धार्मिक विषयों की जानकारी मिलती है।

लेखन का महत्व

  • व्यापारिक रिकॉर्ड
  • कर और प्रशासन
  • अनाज और संसाधनों का हिसाब
  • कानूनी दस्तावेज
  • धार्मिक साहित्य
  • राजकीय आदेश

21. जिगुरात — Ziggurat

जिगुरात मेसोपोटामिया की एक विशिष्ट सीढ़ीनुमा विशाल धार्मिक संरचना थी। इसके ऊपर मंदिर या धार्मिक परिसर स्थित हो सकता था।

जिगुरात की विशेषताएँ

  • बहु-स्तरीय या सीढ़ीनुमा संरचना
  • विशाल ऊँचा मंच
  • ऊपर धार्मिक संरचना
  • नगर के धार्मिक जीवन से संबंध
  • मंदिर संस्थाओं की आर्थिक और सामाजिक भूमिका
महत्वपूर्ण अंतर: जिगुरात और मिस्र के पिरामिड एक जैसे नहीं थे। जिगुरात मुख्यतः मेसोपोटामिया की धार्मिक स्थापत्य परंपरा से जुड़े थे, जबकि मिस्र के पिरामिड मुख्यतः शाही समाधि-स्मारक थे।

22. मेसोपोटामिया का धर्म

मेसोपोटामियाई समाज में धर्म का दैनिक जीवन और राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव था। लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

धार्मिक संस्थाएँ

  • मंदिर
  • जिगुरात
  • पुजारी वर्ग
  • धार्मिक अनुष्ठान
  • देवी-देवताओं को अर्पण

मंदिर केवल धार्मिक केंद्र ही नहीं थे। वे आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधियों से भी जुड़े हो सकते थे।

23. मेसोपोटामिया की अर्थव्यवस्था

कृषि

टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के जल का उपयोग कृषि के लिए किया जाता था। सिंचाई ने उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रमुख आर्थिक गतिविधियाँ

  • कृषि
  • पशुपालन
  • कारीगरी
  • धातु कार्य
  • मिट्टी के बर्तन
  • कपड़ा निर्माण
  • दूर-दराज का व्यापार

24. मेसोपोटामिया का व्यापार

मेसोपोटामिया में कई आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों की कमी थी। इसलिए वहाँ के नगरों को लकड़ी, धातु और अन्य कच्चे माल के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से व्यापार करना पड़ता था।

व्यापार के प्रमुख क्षेत्र

  • ईरानी पठार
  • अनातोलिया
  • लेवांत
  • फारस की खाड़ी क्षेत्र
  • दक्षिण एशिया के साथ संपर्क

25. मेसोपोटामिया की राजनीतिक व्यवस्था

प्रारंभिक मेसोपोटामिया में नगर-राज्य महत्वपूर्ण राजनीतिक इकाइयाँ थे। समय के साथ बड़े राज्यों और साम्राज्यों का भी विकास हुआ।

  • नगर-राज्य
  • राजा
  • प्रशासक
  • सैनिक
  • पुजारी
  • कर व्यवस्था
  • मंदिर संस्थाएँ
  • लिखित प्रशासन

हम्मुराबी

बेबीलोन के राजा Hammurabi का नाम उसके कानूनों के प्रसिद्ध संग्रह के कारण विशेष रूप से जाना जाता है। यह संग्रह प्राचीन कानून और सामाजिक व्यवस्था को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।

26. मेसोपोटामियाई समाज

मेसोपोटामियाई समाज में अलग-अलग सामाजिक और व्यावसायिक समूह थे।

  • राजा और शासक वर्ग
  • पुजारी
  • अधिकारी
  • व्यापारी
  • कारीगर
  • किसान
  • मजदूर
  • दास और निर्भर श्रमिक

27. प्राचीन मिस्र की सभ्यता

प्राचीन मिस्र की सभ्यता उत्तर-पूर्वी अफ्रीका में नील नदी के किनारे विकसित हुई। नील नदी ने मिस्र के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन को आकार दिया।

नील नदी का महत्व

  • कृषि के लिए पानी
  • उपजाऊ मिट्टी
  • सिंचाई
  • परिवहन
  • व्यापार
  • बस्तियों का विकास

28. फैरो और मिस्र की राजनीतिक व्यवस्था

प्राचीन मिस्र में राजा को सामान्यतः Pharaoh कहा जाता है। फैरो राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र था।

राज्य की प्रमुख संस्थाएँ

  • फैरो
  • अधिकारी
  • लेखक / Scribes
  • पुजारी
  • सैनिक
  • किसान
  • कारीगर

राज्य कृषि उत्पादन, कर, सिंचाई, निर्माण और प्रशासन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

29. मिस्र के पिरामिड

मिस्र के पिरामिड विशाल स्थापत्य स्मारक थे। इनका संबंध विशेष रूप से राजाओं की समाधियों और परलोक संबंधी धार्मिक मान्यताओं से था।

गीज़ा के पिरामिड

गीज़ा में स्थित पिरामिडों में खुफू का महान पिरामिड सबसे प्रसिद्ध है। यह प्राचीन मिस्र की इंजीनियरिंग और निर्माण संगठन की अद्भुत क्षमता का उदाहरण है।

पिरामिड की विशेषताएँ

  • विशाल पत्थर की संरचना
  • राजकीय समाधि से संबंध
  • परलोक की मान्यता से संबंध
  • उन्नत निर्माण तकनीक
  • विशाल श्रम और संगठन

30. ममीकरण और मिस्र का धर्म

प्राचीन मिस्रवासियों के धार्मिक जीवन में मृत्यु के बाद जीवन की मान्यता का महत्वपूर्ण स्थान था। शरीर को सुरक्षित रखने के लिए ममीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।

ममीकरण का उद्देश्य शरीर को लंबे समय तक सुरक्षित रखना था। यह मिस्र की परलोक संबंधी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ था।

31. मिस्र की लेखन प्रणाली — Hieroglyphs

प्राचीन मिस्र में चित्रात्मक संकेतों पर आधारित Hieroglyphic writing प्रसिद्ध थी। इसका उपयोग धार्मिक, प्रशासनिक और स्मारकीय लेखों में किया जाता था।

लेखन का महत्व

  • राजकीय अभिलेख
  • धार्मिक ग्रंथ
  • मंदिरों के अभिलेख
  • प्रशासनिक कार्य
  • स्मारकीय लेख

32. प्रारंभिक चीनी सभ्यता

प्रारंभिक चीनी सभ्यता मुख्यतः चीन की प्रमुख नदी घाटियों के आसपास विकसित हुई। Yellow River अर्थात पीली नदी का क्षेत्र प्रारंभिक कृषि और राजनीतिक केंद्रों के विकास में विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कृषि आधारित अर्थव्यवस्था
  • स्थायी बस्तियों का विकास
  • कांस्य तकनीक
  • प्रारंभिक चीनी लेखन
  • राजवंशीय राजनीतिक व्यवस्था
  • धार्मिक अनुष्ठान
  • विशेषीकृत कारीगर

33. शांग सभ्यता और शांग राजवंश

Shang Dynasty प्रारंभिक चीनी सभ्यता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका विकास लगभग दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में हुआ।

शांग काल की विशेषताएँ

  • राजवंशीय शासन
  • कांस्य धातुकर्म
  • विशेषीकृत कारीगर
  • युद्ध और हथियार
  • धार्मिक अनुष्ठान
  • पूर्वज पूजा
  • Oracle Bone inscriptions
  • राजनीतिक और सामाजिक संगठन

34. ऑरेकल बोन लेख — Oracle Bone Inscriptions

प्राचीन चीन में पशुओं की हड्डियों और कछुए के खोल पर पाए गए लेख प्रारंभिक चीनी लेखन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

इनका उपयोग भविष्यवाणी और धार्मिक प्रश्नों के संदर्भ में किया जाता था। इन अभिलेखों से शासकों, युद्ध, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

महत्वपूर्ण उपलब्धि: Oracle Bone inscriptions प्रारंभिक चीनी लेखन के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक प्रमाणों में से हैं।

35. चीन में कांस्य तकनीक

प्रारंभिक चीन में कांस्य धातुकर्म अत्यंत विकसित था। धार्मिक अनुष्ठानों और राजकीय प्रतिष्ठा से जुड़े बड़े कांस्य पात्र तथा अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं।

कांस्य तकनीक का महत्व

  • धार्मिक पात्र
  • हथियार
  • औजार
  • अनुष्ठानिक वस्तुएँ
  • राजकीय शक्ति और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन
  • विशेषीकृत कारीगरों का विकास

36. प्रारंभिक चीनी समाज

प्रारंभिक चीनी समाज में शासक परिवार, योद्धा, धार्मिक विशेषज्ञ, कारीगर, किसान और अन्य श्रमिक समूह मौजूद थे।

प्रमुख सामाजिक समूह

  • राजा और राजपरिवार
  • योद्धा
  • पुजारी और धार्मिक विशेषज्ञ
  • कारीगर
  • किसान
  • श्रमिक

37. प्रारंभिक चीन की राजनीतिक व्यवस्था

शांग काल में राजा राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र था। राज्य का संबंध युद्ध, भूमि, कर, अनुष्ठान और सामाजिक संगठन से था।

  • राजा
  • राजकीय परिवार
  • सैनिक संगठन
  • स्थानीय प्रमुख
  • धार्मिक अधिकारी
  • कारीगर और श्रमिक

38. प्रारंभिक चीनी सभ्यता की उपलब्धियाँ

लेखन

Oracle Bone inscriptions ने प्रारंभिक चीनी लेखन की परंपरा को प्रमाणित किया।

कांस्य तकनीक

उत्कृष्ट कांस्य पात्र, हथियार और अनुष्ठानिक वस्तुएँ।

कृषि

नदी घाटियों में कृषि आधारित बस्तियों का विकास।

राजनीतिक संगठन

राजवंशीय शासन और संगठित राजनीतिक संस्थाओं का विकास।

39. चार प्रमुख प्रारंभिक सभ्यताओं की तुलना

विशेषता हड़प्पा मेसोपोटामिया मिस्र चीन
मुख्य क्षेत्र सिंधु और संबंधित नदी क्षेत्र टिगरिस–यूफ्रेटीस नील घाटी पीली नदी और अन्य नदी घाटियाँ
लेखन हड़प्पा लिपि — अपठित कीलाक्षर हाइरोग्लिफ्स प्रारंभिक चीनी लेखन
राजनीति सटीक स्वरूप अज्ञात नगर-राज्य और बाद में बड़े राज्य फैरो आधारित राजतंत्र राजवंशीय व्यवस्था
विशेष स्थापत्य नालियाँ, नगर योजना, जल प्रबंधन जिगुरात पिरामिड और मंदिर कांस्य और राजकीय केंद्र
अर्थव्यवस्था कृषि, शिल्प, व्यापार कृषि, शिल्प, व्यापार नील आधारित कृषि, व्यापार कृषि, शिल्प और क्षेत्रीय व्यापार

40. सभ्यता के विकास की व्यापक समय-रेखा

लगभग 26 लाख वर्ष पहले

प्रारंभिक पत्थर के औजारों से जुड़ी पुरापाषाण परंपराएँ।

मध्यपाषाण चरण

सूक्ष्म पाषाण औजार और भोजन प्राप्त करने की विविध रणनीतियाँ।

नवपाषाण चरण

कृषि, पशुपालन और स्थायी बस्तियों का विकास।

ताम्रपाषाण चरण

ताँबे और पत्थर का संयुक्त उपयोग।

कांस्य युग

धातुकर्म, शिल्प, व्यापार और प्रारंभिक नगरीय सभ्यताओं का विकास।

लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व

हड़प्पा सभ्यता का परिपक्व नगरीय चरण।

प्रारंभिक मेसोपोटामियाई नगर

सुमेरियन नगर-राज्यों का विकास।

प्राचीन मिस्र

नील घाटी में केंद्रीकृत राजतंत्र और विशाल स्थापत्य का विकास।

प्रारंभिक चीन

शांग काल में कांस्य तकनीक और प्रारंभिक लेखन का विकास।

41. महत्वपूर्ण शब्दावली

शब्द अर्थ
पुरातत्व भौतिक अवशेषों के आधार पर अतीत का अध्ययन।
पुरापाषाण पुराना पाषाण युग।
मध्यपाषाण मध्य पाषाण युग।
नवपाषाण नया पाषाण युग, जिसमें कृषि और पशुपालन का विकास हुआ।
ताम्रपाषाण ताँबा और पत्थर के संयुक्त उपयोग का चरण।
कांस्य मुख्यतः ताँबा और टिन की मिश्रधातु।
सभ्यता जटिल सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्था वाला विकसित समाज।
नगरीकरण नगरों के विकास और विस्तार की प्रक्रिया।
कीलाक्षर मेसोपोटामिया की लेखन प्रणाली।
जिगुरात मेसोपोटामिया की सीढ़ीनुमा धार्मिक संरचना।
फैरो प्राचीन मिस्र के राजा के लिए प्रयुक्त पद।
ममीकरण मृत शरीर को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया।
हाइरोग्लिफ्स प्राचीन मिस्र की चित्रात्मक लेखन प्रणाली।
Oracle Bones प्रारंभिक चीनी लेखन के लिए प्रयुक्त हड्डियाँ और कछुए के खोल।

42. त्वरित पुनरावृत्ति

  • मानव इतिहास का विकास लाखों वर्षों में हुआ।
  • पाषाण युग के तीन प्रमुख चरण पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण हैं।
  • पुरापाषाण काल में शिकार और संग्रह प्रमुख थे।
  • मध्यपाषाण काल में सूक्ष्म पाषाण औजारों का विकास हुआ।
  • नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन का विकास हुआ।
  • ताम्रपाषाण काल में ताँबा और पत्थर दोनों का उपयोग हुआ।
  • कांस्य युग में धातुकर्म, व्यापार और शहरीकरण बढ़ा।
  • हड़प्पा सभ्यता दक्षिण एशिया की प्रमुख प्रारंभिक नगरीय सभ्यता थी।
  • हड़प्पाई नगरों में उन्नत जल निकासी और नगर योजना थी।
  • हड़प्पा लिपि अभी तक निर्णायक रूप से अपठित है।
  • मेसोपोटामिया टिगरिस और यूफ्रेटीस नदियों के बीच विकसित हुआ।
  • सुमेरियन नगर-राज्य प्रारंभिक शहरी राजनीतिक संगठन के उदाहरण हैं।
  • कीलाक्षर मेसोपोटामिया की महत्वपूर्ण लेखन प्रणाली थी।
  • जिगुरात मेसोपोटामिया की धार्मिक स्थापत्य संरचना थी।
  • मिस्र नील नदी के किनारे विकसित हुआ।
  • फैरो मिस्र की राजकीय व्यवस्था का प्रमुख था।
  • पिरामिड शाही समाधि और परलोक की मान्यताओं से जुड़े थे।
  • हाइरोग्लिफ्स प्राचीन मिस्र की प्रसिद्ध लेखन प्रणाली थी।
  • प्रारंभिक चीन में कांस्य तकनीक और लेखन का विकास हुआ।
  • Oracle Bone inscriptions प्रारंभिक चीनी लेखन के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

43. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न

1. पाषाण युग को कितने भागों में बाँटा गया है?

तीन प्रमुख भाग—पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण।

2. ताम्रपाषाण काल क्या है?

वह चरण जिसमें ताँबे के साथ पत्थर के औजारों का भी उपयोग किया जाता था।

3. कांस्य क्या है?

ताँबा और टिन की प्रमुख मिश्रधातु को कांस्य कहा जाता है।

4. हड़प्पा सभ्यता की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

योजनाबद्ध नगर और उन्नत जल निकासी व्यवस्था इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं।

5. हड़प्पा लिपि की वर्तमान स्थिति क्या है?

हड़प्पा लिपि अभी तक निर्णायक रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है।

6. मेसोपोटामिया का अर्थ क्या है?

दो नदियों के बीच की भूमि—टिगरिस और यूफ्रेटीस के बीच का क्षेत्र।

7. जिगुरात क्या था?

मेसोपोटामिया की सीढ़ीनुमा विशाल धार्मिक संरचना।

8. कीलाक्षर क्या है?

मेसोपोटामिया की प्रारंभिक लेखन प्रणाली, जिसे मिट्टी की पट्टियों पर लिखा जाता था।

9. मिस्र की सभ्यता किस नदी के किनारे विकसित हुई?

नील नदी के किनारे।

10. पिरामिड किससे संबंधित थे?

मुख्यतः शाही समाधियों और परलोक संबंधी धार्मिक विश्वासों से।

11. प्रारंभिक चीनी सभ्यता में कौन-सी नदी महत्वपूर्ण थी?

पीली नदी अर्थात Yellow River महत्वपूर्ण थी।

12. Oracle Bone inscriptions क्या हैं?

हड्डियों और कछुए के खोल पर पाए गए प्रारंभिक चीनी लेख।

44. निष्कर्ष

सभ्यता की शुरुआत मानव इतिहास की एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी। पत्थर के औजारों से लेकर कृषि, पशुपालन, धातुकर्म, व्यापार, लेखन, नगर योजना और राजनीतिक संस्थाओं तक मानव समाज लगातार विकसित हुआ।

हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और प्रारंभिक चीन की सभ्यताएँ इस बात का प्रमाण हैं कि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में मानव समाजों ने अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जटिल सभ्यताओं का निर्माण किया।

इन सभ्यताओं का अध्ययन हमें आधुनिक नगरों, प्रशासन, व्यापार, तकनीक और सामाजिक संगठन की ऐतिहासिक जड़ों को समझने में सहायता करता है।

45. शैक्षणिक टिप्पणी

इस अध्याय में दी गई काल-सीमाएँ व्यापक पुरातात्त्विक समय-सीमाएँ हैं। विभिन्न क्षेत्रों में एक ही तकनीकी या सांस्कृतिक चरण अलग-अलग समय पर विकसित हुआ।

विशेष रूप से हड़प्पा सभ्यता की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था के बारे में प्रमाणों की सीमाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है क्योंकि उसकी लिपि अभी तक निर्णायक रूप से पढ़ी नहीं गई है।

इसी प्रकार मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन के विकास को एक ही समय पर घटित घटना के रूप में नहीं समझना चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी ऐतिहासिक गति और परिस्थितियाँ थीं।

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