सामान्य अर्थों में इतिहास का संबंध अतीत की घटनाओं, समाजों,
संस्थाओं और मानव जीवन में हुए परिवर्तनों के अध्ययन से है।
विशेष अर्थों में इतिहास केवल राजवंशों के उत्थान-पतन या युद्धों
की कहानी नहीं है। यह विभिन्न कालखंडों में उत्पादन, सामाजिक
संरचना, आर्थिक व्यवस्था, राजनीतिक संस्थाओं और सांस्कृतिक
परिवर्तनों के अध्ययन के माध्यम से मानव जीवन के विकास को
समझने का प्रयास है।
UPSC दृष्टिकोण:
इतिहास का उद्देश्य केवल अतीत को जानना नहीं बल्कि अतीत के
आधार पर वर्तमान को समझना और भविष्य के लिए बेहतर दृष्टिकोण
विकसित करना भी है।
सभ्यता (Civilisation)
किसी निश्चित अवधि और भौगोलिक क्षेत्र में मानव समुदाय की
भौतिक, तकनीकी, नगरीय और संस्थागत उपलब्धियों के समुच्चय को
सभ्यता कहा जा सकता है।
संस्कृति (Culture)
संस्कृति में किसी समाज की विचारधारा, जीवन-पद्धति, खान-पान,
पहनावा, परंपराएँ, धार्मिक विश्वास तथा कलात्मक अभिव्यक्तियाँ
शामिल होती हैं। संस्कृति सामान्यतः अधिक व्यापक और दीर्घकालिक
होती है।
2. इतिहास के स्रोत
प्राचीन भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में पुरातात्विक,
साहित्यिक और विदेशी यात्रियों के विवरण महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
पुरातात्विक स्रोत
अभिलेख
सिक्के
मूर्तियाँ
भवन एवं स्मारक
मृद्भाण्ड
मुहरें
गुफाएँ एवं शैलचित्र
अभिलेख (Inscriptions)
पत्थरों, स्तम्भों, धातुओं, गुफाओं तथा भवनों की दीवारों पर
उत्कीर्ण लिखित सामग्री को अभिलेख कहा जाता है।
Prelims Fact:
अभिलेखों का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि वे किसी विशिष्ट
शासक, प्रशासन, धार्मिक नीति, दान, विजय तथा सामाजिक-आर्थिक
स्थितियों के प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध करा सकते हैं।
मेसोपोटामियाई अभिलेख
मेसोपोटामिया के अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र से संबंधित
Meluhha जैसे नामों का उल्लेख मिलता है।
इनसे भारत और मेसोपोटामिया के बीच प्राचीन व्यापारिक संबंधों
का संकेत मिलता है।
मेसोपोटामिया का विकास दजला (Tigris) और फरात (Euphrates)
नदियों के बीच हुआ।
बोगजकोई अभिलेख
एशिया माइनर के बोगजकोई क्षेत्र से प्राप्त अभिलेख में
इन्द्र, वरुण, मित्र और नासत्य जैसे देवताओं
का उल्लेख मिलता है। यह प्राचीन इंडो-ईरानी सांस्कृतिक
संबंधों के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
ईरानी अभिलेख
आकेमेनिड शासकों के अभिलेख उत्तर-पश्चिमी भारत और ईरानी
साम्राज्य के संबंधों को समझने में उपयोगी हैं।
डेरियस प्रथम के समय सिंधु क्षेत्र आकेमेनिड साम्राज्य के
प्रभाव में आया।
3. अशोक के अभिलेख
अशोक के अभिलेख मौर्य प्रशासन, धम्म, सामाजिक नीति और
राजकीय विचारधारा को समझने के प्रमुख स्रोत हैं।
भाषा और लिपि
क्षेत्र/अभिलेख
प्रमुख लिपि/भाषा
अधिकांश क्षेत्र
प्राकृत – ब्राह्मी
शहबाजगढ़ी
खरोष्ठी
मानसेहरा
खरोष्ठी
कंधार क्षेत्र
ग्रीक एवं आरमाइक
अशोक के प्रमुख अभिलेख
वृहद शिलालेख
वृहद स्तम्भ लेख
लघु शिलालेख
लघु स्तम्भ लेख
गुहा अभिलेख
तेरहवाँ शिलालेख
अशोक के तेरहवें प्रमुख शिलालेख में कलिंग युद्ध के बाद
अशोक के पश्चाताप तथा धम्म नीति की ओर उसके झुकाव का
महत्वपूर्ण प्रमाण मिलता है। इसमें पड़ोसी क्षेत्रों तथा
धम्म-विजय की अवधारणा का भी उल्लेख है।
छठा शिलालेख
इससे अशोक की प्रशासनिक दृष्टि तथा प्रजा के कल्याण के प्रति
उसकी चिंता का संकेत मिलता है।
रुम्मिन्देई स्तम्भ लेख
लुम्बिनी से संबंधित यह अभिलेख बुद्ध के जन्मस्थान के रूप में
उस स्थान के महत्व को प्रमाणित करता है।
सारनाथ सिंह शीर्ष
सारनाथ का चार सिंहों वाला स्तम्भ शीर्ष मौर्यकालीन
राजकीय कला की उत्कृष्ट उपलब्धियों में माना जाता है।
यही भारत के राजचिह्न का आधार है।
UPSC याद रखें:
अशोक के अभिलेख = प्रशासन + धम्म + सामाजिक नीति +
राजकीय विचारधारा + मौर्य साम्राज्य के अध्ययन का प्रमुख स्रोत।
4. अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख
अभिलेख
मुख्य जानकारी
अयोध्या अभिलेख
पुष्यमित्र शुंग एवं अश्वमेध यज्ञ से संबंधित जानकारी
हेलियोडोरस स्तम्भ
भागवत/वैष्णव परंपरा एवं इंडो-ग्रीक संबंध
जूनागढ़ अभिलेख
रुद्रदामन एवं सुदर्शन झील
नानाघाट अभिलेख
सातवाहन इतिहास
हाथीगुम्फा अभिलेख
खारवेल एवं कलिंग
प्रयाग प्रशस्ति
समुद्रगुप्त की विजय एवं उपलब्धियाँ
महरौली लौह स्तम्भ
गुप्तकालीन राजा की उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण
ऐहोल प्रशस्ति
पुलकेशिन II और हर्ष के संघर्ष का विवरण
मन्दसौर प्रशस्ति
यशोधर्मन से संबंधित जानकारी
5. सिक्के एवं मुद्राएँ
सिक्कों से आर्थिक स्थिति, व्यापार, राजवंशों का कालक्रम,
धार्मिक विश्वास, शासकों की उपाधियों और साम्राज्य की सीमा
के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
काल
महत्वपूर्ण तथ्य
हड़प्पा
मुहरें; व्यापारिक उपयोग की संभावना
वैदिक
निष्क और शतमान का उल्लेख
छठी शताब्दी ई.पू.
पंचमार्क/आहत सिक्कों का व्यापक प्रयोग
मौर्य
पण/कार्षापण एवं अन्य मुद्रा इकाइयाँ
इंडो-ग्रीक
राजा के चित्र वाले सिक्कों का विकास
सातवाहन
सीसे के सिक्के; जहाज वाले सिक्के
कुषाण
सोने के सिक्कों का महत्वपूर्ण विकास
गुप्त
स्वर्ण मुद्राओं की उत्कृष्ट परंपरा
गुप्तकालीन सिक्के
चन्द्रगुप्त प्रथम – राजा-रानी प्रकार
समुद्रगुप्त – वीणा वादन प्रकार
चन्द्रगुप्त द्वितीय – विभिन्न विजय एवं धार्मिक प्रतीकों वाले सिक्के
कुमारगुप्त – मयूर प्रकार
स्कन्दगुप्त – विभिन्न पशु-प्रतीक वाले सिक्के
Prelims Focus:
समुद्रगुप्त को सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है।
यह उसकी संगीत संबंधी रुचि का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
6. भवन एवं स्मारक
बौद्ध स्थापत्य
प्रकार
अर्थ/उपयोग
स्तूप
पवित्र बौद्ध स्मारक
विहार
भिक्षुओं का निवास एवं बाद में शिक्षा केंद्र
चैत्य
बौद्ध पूजा/प्रार्थना गृह
प्रमुख स्तूप
सांची, भरहुत, अमरावती आदि बौद्ध स्थापत्य के महत्वपूर्ण
केंद्र हैं।
प्रमुख प्राचीन शिक्षा केंद्र
तक्षशिला
नालंदा
विक्रमशिला
ओदन्तपुरी
सोमापुरी
गुफाएँ
बाराबर की गुफाएँ मौर्यकालीन शैल वास्तुकला का महत्वपूर्ण
उदाहरण हैं। इनका संबंध आजीवक संप्रदाय से भी रहा।
गुप्तकालीन मंदिर
देवगढ़ का दशावतार मंदिर
भीतरगाँव मंदिर
तिगवा मंदिर
भूमरा मंदिर
नचना-कुठार मंदिर
उदयगिरी गुफा-मंदिर
7. मानव बस्तियाँ एवं पाषाण काल
पुरापाषाण काल (Palaeolithic)
शिकार एवं खाद्य-संग्रह प्रमुख गतिविधियाँ
घुमंतू जीवन
पत्थर के औजार
हैंडऐक्स, क्लीवर आदि
आग का उपयोग मानव विकास में महत्वपूर्ण
नवपाषाण काल (Neolithic)
कृषि का विकास
स्थायी निवास
पशुपालन
मृद्भाण्ड निर्माण
औजारों में सुधार
प्रमुख कृषि साक्ष्य
फसल
प्रमुख स्थल
गेहूँ
मेहरगढ़
चावल
गंगा घाटी के नवपाषाण स्थलों से संबंधित साक्ष्य
नगरीकरण
हड़प्पा सभ्यता को भारतीय उपमहाद्वीप में प्रथम नगरीकरण से
जोड़ा जाता है। दूसरा नगरीकरण सामान्यतः गंगा घाटी में
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास महाजनपद काल के संदर्भ में
समझा जाता है।
8. मूर्तिकला
हड़प्पाकालीन मूर्तिकला
हड़प्पा सभ्यता से कांस्य तथा पत्थर की उल्लेखनीय मूर्तियाँ
प्राप्त हुई हैं।
प्रमुख उदाहरण:
मोहनजोदड़ो की कांस्य नर्तकी तथा पुरोहित-सदृश प्रतिमा
हड़प्पाकालीन कला की प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।
मौर्यकालीन कला
मौर्यकाल में राजकीय कला विशेष रूप से अशोक के स्तम्भों और
उनके पशु-शीर्षों में दिखाई देती है।
गांधार कला
उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में विकास
यूनानी-हेलेनिस्टिक एवं बौद्ध तत्वों का समन्वय
यथार्थवादी शैली
बुद्ध की मानवाकार प्रतिमाओं का विकास
ग्रे शिस्ट आदि पत्थरों का प्रयोग
मथुरा कला
भारतीय/देशी परंपरा से विकसित
लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग
बौद्ध, जैन और ब्राह्मणical परंपराओं की मूर्तियाँ
बुद्ध की मानवाकार प्रतिमाओं के विकास में महत्वपूर्ण
गांधार
मथुरा
हेलेनिस्टिक प्रभाव
देशी भारतीय परंपरा
ग्रे शिस्ट
लाल बलुआ पत्थर
यथार्थवादी प्रवृत्ति
आदर्शवादी प्रवृत्ति
मुख्यतः बौद्ध कला
बौद्ध, जैन और ब्राह्मणical कला
गुप्तकालीन मूर्तिकला
गुप्तकालीन मूर्तियों में आध्यात्मिक शांति, संतुलन और
आदर्श सौंदर्य की विशेषता दिखाई देती है।
9. चित्रकला
भीमबेटका
भीमबेटका के शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव के जीवन, शिकार,
पशुओं तथा सामाजिक गतिविधियों की जानकारी देते हैं।
हड़प्पाकालीन चित्रकला
मिट्टी के बर्तनों तथा मुहरों पर पशु-पक्षियों, ज्यामितीय
आकृतियों और विभिन्न प्रतीकों का अंकन मिलता है।
अजंता की चित्रकला
अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र में स्थित हैं और भारतीय
भित्तिचित्र कला की महान उपलब्धियों में गिनी जाती हैं।
इनमें जातक कथाओं तथा बौद्ध विषयों का प्रमुख स्थान है।
अजंता के प्रमुख विषय:
पद्मपाणि अवलोकितेश्वर
जातक कथाएँ
बुद्ध के जीवन से संबंधित दृश्य
राजकीय एवं सामाजिक जीवन के दृश्य
बाघ की चित्रकला
बाघ की गुफाएँ मध्य प्रदेश में स्थित हैं। इनके चित्रों में
धार्मिक विषयों के साथ-साथ सामाजिक और लौकिक जीवन के
दृश्य भी दिखाई देते हैं।
प्रमुख चित्र-विषय
नृत्य सभा
संगीत आयोजन
उत्सव
राजकीय जुलूस
राजदरबार
हाथियों से संबंधित दृश्य
नर्तक एवं नर्तकियाँ
UPSC Prelims Fact:
अजंता – महाराष्ट्र
बाघ – मध्य प्रदेश
भीमबेटका – मध्य प्रदेश
10. UPSC Prelims Focus – Quick Revision
विषय
याद रखने योग्य तथ्य
अशोक
अभिलेखों से धम्म और प्रशासन की जानकारी
सारनाथ
चार सिंहों वाला स्तम्भ शीर्ष
हेलियोडोरस
बेसनगर स्तम्भ और भागवत परंपरा
रुद्रदामन
जूनागढ़ अभिलेख
समुद्रगुप्त
प्रयाग प्रशस्ति एवं वीणा प्रकार के सिक्के
गांधार
हेलेनिस्टिक प्रभाव
मथुरा
लाल बलुआ पत्थर एवं देशी परंपरा
अजंता
बौद्ध विषय एवं उत्कृष्ट भित्तिचित्र
बाघ
लौकिक/सामाजिक जीवन के चित्र
भीमबेटका
प्रागैतिहासिक शैलचित्र
11. UPSC Mains Focus
प्रश्न 1
प्राचीन भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखों और
सिक्कों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
प्रश्न 2
गांधार और मथुरा कला की प्रमुख विशेषताओं की तुलना कीजिए।
प्रश्न 3
अशोक के अभिलेख मौर्य प्रशासन और धम्म नीति को समझने में
किस प्रकार सहायक हैं?
प्रश्न 4
प्राचीन भारत में कला के विकास में धार्मिक एवं लौकिक
परंपराओं की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
प्रश्न 5
अजंता और बाघ की चित्रकला भारतीय समाज एवं संस्कृति के
अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। विवेचना कीजिए।
🔑 Important Keywords
Ancient HistoryUPSCAshokaMauryan ArtInscriptionsCoinsGandhara ArtMathura ArtAjantaBagh CavesHarappan CivilizationGupta ArtBuddhist ArchitecturePrehistoric India